नाम | Dastaan-e-lafz

जिस पर देता था मैं जान वार
जिसे मैं करता था प्यार
पर उसने मेरे इज़हार को
कर दिया इंकार 
मुझ पे यारों करो एक एहसान
मुझसे ना पूछो उस लड़की का नाम ....

गल तुमनु सुनावा अपने पहले प्यार दी
कहानी है यारों ये तुम्हारे यार दी
जिसे अस्सी डर डर के कित्ता सी इज़हार
उसने तुम्हारे यार दे प्यार नु कर दिया इंकार 

जिसे अपना कहा
जिसे मैंने बेइंतहा चाहा
मिला न यारों
मेरे प्यार को वो मुकाम
मुझसे न पूछो यारों उस लड़की का नाम....

लड़की के बारे में क्या बताऊँ
वो है चाँद से भी सोहनी
इस धरती पे उसके जैसी कोई दूसरी ना  होनी
जो था मेरा  दिलदार
जिस पे दिल गया हार

जिसकी गली विच बैठे हो जाती सुबह से शाम
मुझसे ना पूछो यारों उस लड़की का नाम.... 

जिसकी वजह से चलती थी मेरी साह
पूरी की मैंने  उसकी हर एक चाह 
जो लाती उसको मेरे दिल के करीब 
उसने कभी वो पकड़ी ही ना राह 

भूला जाता नहीं उसका चेहरा 
उसके बिना दिखता चारों तरफ अँधेरा 
जो थी मेरे लिए इतनी ख़ास
पर उसके लिए मैं रह गया आम 
मुझसे ना पूछो यारों उस लड़की का नाम......

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